*For that one medico social media account still a distant dream *( a light note write up)
कल शाम चाय के प्याले की पहली घूँट लेते ही पतिदेव अनायास ही बोल पड़े , ये ट्विटर अकाउंट कैसे खोलते है। प्रश्न सुन कर मुझे मेरे कानो की श्रवण शक्ति पर आपार आशंकाना होने लगी। बैंक अकाउंट खोलने पर चर्चा सुनी थी , पर सोशल मीडिया अकाउंट और पुरातन कालेन साइकेट्रिस्ट दोनों जैसे सामंजस्य ही ना बिठा सके। खैर, बिना कुछ आगे की कहानी सुने , हम ने फरमान सुनाया – आप पर ट्विटर आकउंट सूट नहीं करेगा। उन्होंने चाय का प्याला नीचे रखते हुए बड़ी अंचभित आँखों से मुझे देखते हुए विनम्रता से आग्रह किया – अरे बाजार से लाल रंग की कमीज थोड़े ही ना खरीदनी है जो मुझ पर सूट ना हो , एक बेचारा अदना सा अकाउंट ही तो है। अब मेरी झुंझुलाहट स्वाभाविक ही थी – “ अरे ये सोशल
मीडिया आप जैसे मनोचिकित्सक के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकती है। वैसे भी psychiatrist को अपनी और परिवार की सुरक्षा हेतु , अपनी पहचान छुपा कर चलने के ही निर्देश देती है ऑस्ट्रेलियन संस्थाने I और किसी भले मानस ने कुछ उल्टा पुल्टा लिख दिया तो ? खैर , चाय के कप की समाप्ति तक एक सफल मनोचिकित्सक का ट्विटर अकाउंट शुरू होने से पूर्व ही डिलीट हो चूका था।

