गलती तो तुम्हारी ही कहलायेगी
फिर चाहे इस बार भी इस वार से
जान तुम्हारी ही जायेगी
क्रूरता की सीमा चाहे इस बार भी पार हो जाएगी
पर गलती तो तुम्हारी ही कहलायेगी
समाज की विकृत हुई मानसिकता को
ना समझ पाने की विफलता की जिम्मेदारी भी
तुम्हारी ही अक्षमता जानी जाएगी
क्योंकि गलती तो तुम्हारी ही कहलाएगी
नैतिकता के पाठ पर तुम्हारी छवि को
धूमिल करने की सीख तुमको ही सिखाई जाएगी
हर क्षण भय में जीने की आदत भी तुमको ही पढ़वाई जाएगी
निःशब्द रहो जब धमकी की बौछार तुम पर की जाएगी
निरुद्देश्य ही तुम्हारी मृत्यु की कामना की जाएगी
निर्लज्जों की भीड़ अब तुम पर ही धारदार अस्त्र उठाएगी
निश्चय ही गलती तुम्हारी ही मानी जाएगी
दारू का सेवन करके चाहे दिमाग की सोचने
की ताकत को नष्ट कर चुके लोगो की
समझदारी को वाह वाही दी जाएगी
उनके द्वारा बीवी बच्चो और माता पिता को पीटने की पिछली कहानियो को अनदेखा करने की मुहिम चलायी जाएगी
साथ ही तुमको ख़त्म करने की कोशिश भी
ऐसे लोगो के हाथो में दे दी जाएगी
अब ऐसे में गलती तुम्हारी ही मानी जाएगी


just wow … such great composition and a true reflection of the state of health professionals. I am amazed at the depth of words used …. Touched my heart. Well done Dr Gargi – super proud
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